धर्मेंद्र उनियाल’धर्मी’
टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड

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पेपर होणा लीक भैजी,
अर बाकी सब ठीक भैजी।
ह्वै पटवारी कू इम्तिहान,
बल बग्वाल्यों कू दीप भैजी।
यख नौकरी दबईं दलालू न
दलालू मजी न खींच भैजी।
बल बेरोजगारी फैलीं यख,
उत्तराखंड मा छकीक भैजी।
अब पढै लिखै बेकार ह्वैगी ,
चलणी दलाली की रीत भैजी।
झूठ चमकणू सूरज जनू
सच पर दाग अर छींट भैजी।
उत्तराखंड मा मिलण लैगी,
मुआवजों की भीख भैजी।
बल आपदा की मार होंदी,
बाल सी भी बरीक भैजी।
भरोसू हमारू कच्चू ह्वैगी,
पक्की नेताओं की सीट भैजी।
भ्रष्टाचार का खिलाफ अब,
तू भी मुट्ठी भींच भैजी।


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