जीके पिपिल
देहरादून,उत्तराखंड

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गज़ल
वो इस क़दर इम्तिहान दर इम्तिहान लेते गए
मछली ना बदली तो टूटा तीर कमान देते गए
वो ना शांति से जिए ना किसी को जीने दिया
वो किसी को दीया किसी को तूफ़ान देते गए
नए निज़ाम को खज़ाने का पता मत बोलना
सब खजांचियों को आखरी फरमान देते गए
उन्होंने जीते जी किसी को लाभ ना होने दिए
भले ही अपने कारोबार को नुकसान देते गए
उनका ख़ुद का लिखा हुआ तो कुछ था नहीं
कोई चुराया हुआ छापने को दीवान देते गए
जो लावारिश औलादें बस्ती में घूमा करती हैं
अन्त में उन्हें अपने नाम की पहचान देते गए
कभी भी हमारी उड़ान को पूरा ना होने दिया
एक ख़त्म किया तो दूसरा आसमान देते गए


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