April 21, 2026

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उत्तराखंड साहित्य सम्मेलन के वासंती बयार कार्यक्रम में बही काव्य की रसधार

उत्तराखंड साहित्य सम्मेलन (साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक मंच) और हिमालय विरासत न्यास ने वसंत के उपलक्ष्य में आयोजित किया वासंती बयार कार्यक्रम।

देहरादून। उत्तराखंड साहित्य सम्मेलन (साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक मंच) और हिमालय विरासत न्यास की ओर से वसंत के उपलक्ष्य में 6- प्रीतम रोड डालनवाला में वासंती बयार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों/रसों पर काव्य की गंगा बही। शानदार काव्य पाठ कर कवियों ने खूब वाहवाही लूटी।

वासंती बयार कार्यक्रम का शुभारंभ कवि जीके पिपिल की सरस्वती वंदना ‘मां सरस्वती मां सरस्वती तेरे आगे नतमस्तक है हर कला के साधक यति जति, निर्बाध रहे निष्कंटक हो चले सही दिशा में मेरी मति मां सरस्वती मां सरस्वती” साथ हुआ। इसके बाद शांति बिंजोला ने माँगल ‘दैण होइयाँ खोली का गणेशा दैण होइयाँ मोरी का नारैणा’ गाकर माहौल भक्ति में बना दिया।

काव्य गोष्ठी का शुभारंभ नीलम पांडेय नील की ओजपूर्ण रचना से हुआ। उन्होंने पढ़ा कि ‘मारना मुझे यूं मारना, कि जिंदा ना रहूं किसी यादों में, बातों में, प्रशंसाओं में, आलोचनाओं में भी और मार सको तो, मेरी हसरतों को भी मारना’। नीलम पांडेय को सभी की खूब सराहना मिली।

वहीं, ओज के कवि श्रीकांत श्री ने ‘भारती का मान बढ़े मंत्र कहीं खो गया, बे मिसाल लोकतंत्र लूट तंत्र हो गया’ सुनाकर वाहवाही लूटी।

कवि/गीतकार वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” ने देशभक्ति पूर्ण छंद पढ़ते हुए कहा कि “मात भारती को हाथ जोड़कर प्रणाम मेरा, चरणों में उनके सतीश वंदन है’, इसके बाद उन्होंने श्रृंगार का एक गीत पढ़ा ‘अति सुंदर मनभावन पवन रूप तुम्हारा तपते तन पर रिमझिम सावन रूप तुम्हारा’। जीके पिपिल ने प्रेम पर शानदार रचना करते हुए पढ़ा ‘तुम चलना कभी मेरे साथ प्रिय तक़रीर सुनानी है तुमको, इस दिल में उजड़ी उल्फ़त की जागीर दिखानी है तुमको’। उन्हें खूब वाहवाही मिली।


इसके साथ ही सुनीता मिश्रा ने वसंत पर सुंदर रचना ‘सादर अभिनंदन करू, वंदन करू मैं बारंबार, हृदय पुष्प खिले हुए हैं, खुशिया आई मेरे द्वार सुनाई। उर्मिला सिंह ने इल्मोअदब से वास्ता रखते हैं जो, लबों पर शुक्र आंखों में हया रखते हैं वो, ज़माना चाहे जितनी मुख़ालफ़त कर ले, रब की रहमतों पर भरोसा रखते हैं वो”,

महेन्द्र प्रकाशी ने :ज़रा खुलकर कहें भगवान अंधा हो नहीं सकता, अमीरी भाग्य में लिखना तो धंधा हो नहीं सकता, तुम्हारे जैसे लोगों ने गिराई हुई कुछ स्याही, नहीं तो पाठ इतना भी तो गंदा हो नहीं सकता’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।

वहीं, सुखजिंदर कौर ने वसंत पर पढ़ा ‘आई बसंत रितु आई खुशहाली छटा मन भायी, नव, यौवन, रंग, ताल, चाल नव भानु प्रकाश केसर ललाट, मोहक धरा ने छवि पाई, वीणा वादिनी के स्वर बोले, कण कण समीरन केसर घोले, शुभ श्रीदाशिष् मिल पाई ,आई बसंत रितु आई’ सुनाकर सभी को वसंत के रंगों से आनंदित कर दिया। शांति बिंजोला ने ‘नारी की गरिमा पल्लू, नारी की महिमा पल्लू, नारी की भंगिमा पल्लू, नारी का श्रृंगार है’ सुनाया वाहवाही लूटी।

डॉ मनोरमा नौटियाल ‘यूँ पुकारा उसने मेरा नाम, देर तक बंधी चुप के बाद, खुली हों जैसे गिरहें तमाम, भीलनी को जैसे मिल गए हों अचानक राम’ सुनाकर सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। दूसरी ओर हास्य कवि नरेंद्र शर्मा अमन ने ‘जाने क्या क्या टेस्ट करवाए, लेकिन बीमारी पकड़ न पाए, ऐसे डॉक्टर से राम बचाए के माध्यम सबको हंसाकर लोटपोट कर दिया। वहीं, उत्तराखंड साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष नरेंद्र उनियाल ने अपनी लघु कथाओं का पाठ किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार पूर्व कुलपति डॉ सुधारानी पाण्डेय ने कहा कि वासंती बयार कार्यक्रम में देहरादून के लगभग सभी कवि मौजूद हैं। बहुत सुंदर रचनाएं विभिन्न रसों पर कवियों ने सुनाई। उन्होंने कवियों की खूब तारीफ की। साथ ही सुझाव दिया कि देहरादून में पूरे दिन का अखंड कवि सम्मेलन आयोजित किया जाय, जिसमें लगभग 100 कवियों की भागेदारी हो और 1000 युवा श्रोता सुनने वाले हों। उन्होंने शानदार आयोजन के लिए उत्तराखंड साहित्य परिषद के पदाधिकारियों को बधाई भी दी।

मुख्य अतिथि कला, संस्कृति एवं साहित्य परिषद उत्तराखंड की उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) मधु भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड साहित्य सम्मेलन ने वसंत के उपलक्ष्य में बहुत सुंदर आयोजन है। साहित्य समाज का दर्पण होता है, समाज में साहित्य का माहौल बनना चाहिए। कहा कि मैं साहित्य के क्षेत्र में होने वाले काम में पूरा सहयोग करूंगी। उन्होंने साहित्य के विकास के लिए सुझाव भी मांगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा काम कर रही है। साहित्य के विकास के लिए भी सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है।

विशिष्ट अतिथि गिरि गौरव मासिक पत्रिका के संपादक राजीव उनियाल ने कहा कि इतने कवियों को एक साथ सुनना सुखद अनुभव रहा। वसंत की उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बहुत ही सुंदर रचनाएं सुनने को मिली, इसके लिए मैं उत्तराखंड साहित्य सम्मेलन संस्था को बधाई देता हूं।

कार्यक्रम में अंबिका सिंह रूही, डॉ नूतन गैरोला, डॉ सत्यानंद बडोनी, सुभाष चंद वर्मा, जसवीर सिंह हलधर, राज कुमार ‘राज’, डॉ विद्या सागर कापड़ी, नीरज नैथानी, अनिल शास्त्री, रवींद्र सेठ, परमवीर कौशिक आदि ने भी काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन वीरेंद्र डंगवाल पार्थ ने किया। इस अवसर पर प्रमोद मिश्रा, बृजपाल रावत, सूरज नेगी, पीतांबर कुमार, आलोक बहुगुणा आदि मौजूद रहे।

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