सुभाष चंद वर्मा
रक्षा अधिकारी (से.नि.)
विजय पार्क, देहरादून

———————————————————–
हे ‘महामानव’ तुझे प्रणाम
कभी प्यासा, कभी भूखा रहकर
तिरस्कार की, पीड़ा सहकर
रहने का, नहीं ठौर-ठिकाना
‘निर्बल’ मानव, ‘निर्मल’ रहकर
जीवन भर, करता ‘श्रम- दान’
हे ‘श्रम-जीवी’, तुझे ‘प्रणाम’
सीमा पर ‘आतंक’ खड़ा है
रक्षा का ‘संकल्प’ बड़ा है
‘भारत माँ’ का वीर सिपाही
‘शत्रु’ से, हर बार भिड़ा है
करता है, ‘जीवन’ बलिदान
हे ‘मातृ-रक्षक’, तुझे ‘प्रणाम’
जीता, खुद को ‘अभाव’ में रखकर
बेटों को ‘सुख-सुविधाओं’ में रखकर
‘सपने’ सबके, ‘साकार’ बनाता
रोज ‘कड़ी- मेहनत’ से थककर
‘वृद्धाश्रम’ में, कटती ‘शाम’
हे ‘कर्म-योगी’, तुझे ‘प्रणाम’
‘जंगल’ में ‘संघर्ष’, बड़े हैं
‘खतरे’ में, ‘वर्चस्व’ पड़े हैं
‘दरख्तों’ से ‘लिपट-चिपट’ कर
‘बहुगुणा’, ‘सुंदर लाल’ खड़े हैं
खूब चलाया, ‘पेडों की रक्षा’ का ‘अभियान’
हे ‘महामानव’, तुझे ‘प्रणाम’
हे ‘महामानव’, तुझे ‘प्रणाम’


More Stories
प्रसव पीड़ा में तड़पती रही गर्भवती, 10 किमी पैदल चलकर पहुंची अस्पताल
रुड़की में कांवड़ पटरी पर चार बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत, तीन की मौत
आवाजाही खतरनाक: थलन के पास धंस रहा लंबगांव मोटर मार्ग