जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड

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गज़ल
कहते तो वो पूरा आसमां दे देता मगर मैंने सितारा मांगा
सारा समंदर लेकर मैं क्या करता मैंने बस किनारा मांगा।
ऐसे ही नहीं देती दुनियां हमारी खुद्दारी की मिसाल यहां
मुफलिसी में भी हमने भीख नहीं मांगी बस उधारा मांगा।
सोचो, तो उसकी भी कितनी बड़ी मुश्किल रही होगी
जिसने एक बार असर नहीं होने पर ज़हर दोबारा मांगा।
ये प्रभु पर भरोसे की पराकाष्ठा नहीं थी तो और थी क्या
डूबना नियति था फिर भी हमने तिनके का सहारा मांगा।
कहते तो वो ढो भी सकता था हमारे सर का सारा बोझ
लेकिन हमने उससे सर तक बोझ उठाने में सहारा मांगा।।


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