April 6, 2026

Uttarakhand Meemansa

News Portal

दून बुक फेस्टिवल-2026 का मुख्यमंत्री धामी ने किया शुभारंभ

उत्तराखंड मीमांसा न्यूज (ब्यूरो)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित ‘दून बुक फेस्टिवल-2026’ का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रकाशकों के स्टॉलों के अवलोकन के साथ गढ़वाली व कुमांऊनी पुस्तकों का लोकार्पण भी किया। धामी ने कहा कि डिजिटल युग में पुस्तकों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। पुस्तकें सोच को गहरा व स्थायी बनाती हैं। इसलिए पुस्तकें अवश्य पढ़नी चाहिए।

शिक्षा मंत्रालय, केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देशभर से आए साहित्यकारों, कलाकारों व साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि पुस्त्कों का यह महोत्सव साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम है, जो समाज में ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ दिवसीय महोत्सव में विभिन्न सत्रों, संवाद कार्यक्रमों, पुस्तक परिचर्चाओं व ‘लेखक से मिलिए’ जैसे आयोजनों के माध्यम से साहित्यिक विमर्श को समृद्ध किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों के लिए स्थापित ‘चिल्ड्रेन पवेलियन’ को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी में पठन-पाठन की रुचि विकसित होगी।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि की इस पावन भूमि ने अनेक महान साहित्यकारों को जन्म दिया है और यह प्रदेश सदैव ज्ञान, संस्कृति एवं सृजन का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान”, “साहित्य भूषण” तथा अन्य पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है, साथ ही विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन हेतु अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में साहित्य ग्रामों की स्थापना की जा रही है, जिससे साहित्यकारों को सृजन के लिए अनुकूल वातावरण मिल सकेगा तथा उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान का स्थायी स्रोत हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी समाज को दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे विभिन्न अवसरों पर उपहार स्वरूप पुस्तकों व पौधों को प्रोत्साहित करें, जिससे समाज में ज्ञान व पर्यावरण दोनों के प्रति जागरूकता बढ़े।

कार्यक्रम कैबिनेट मंत्री खजान दास, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, पतंजलि से आचार्य बालकृष्ण, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिन्द मराठी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक, देवभूमि विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष अमन बंसल आदि मौजूद रहे।

एआई सूचना देगा, सच्चाई पुस्तकें ही बताएंगी : आचार्य बालकृष्ण

पतंजिल योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि एआई चेतन नहीं, जड़ है। उसमें सूचनाएं डाली जाएंगी जिसे वो बातएगा। डिजिटल सूचना दे सकता है। लेकिन, सच्चाई जानने के लिए हमें पुस्तक ही पढ़नी होगी। उन्होंने युवाओं व छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि बुक फेस्टिवल पुस्तकों से जुड‍़ने का अच्छा अवसर है, इसलिए इससे अवश्य जुड़ें। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ का कहना है, वनस्पतियों की खोज काम बहुत कठिन है। इसलिए उसने अपना कार्यक्रम टाल दिया। लेकिन, पतंजिल वनस्पितयों को ढूंढ़ने का काम कर रहा है। अब तक 50 हजार वनस्पतियों की खोज की गई है। जिस पर निरंतर काम चल रहा है।

news