वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ”
देहरादून, उत्तराखंड
मो. 9412937280

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जीवन ये अनमोल है, समझो इसका सार।
काम क्रोध की भावना, मन से सदा बिसार।।1।।
लोभ मोह करता पतित, इसका रखियो ध्यान।
भव सागर आसान हो, जीवन का ये ज्ञान।।2।।
प्रीत रीत निभ जाय तो, सुखमय हो संसार।
घर आंगन कुसुमित रहे, खुशियों की रसधार।।3।।
जग में ऊंचा नाम हो, ऐसा करो विचार।
क्योंकि हमें मिलना नहीं, जीवन बारंबार।।4।।
मात-पिता सम देवता, उनका करना मान।
यश कीर्ति वैभव मिले, सकल जगत सम्मान।।5।।
Copyright Virendra dangwal parth


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