जय कुमार भारद्वाज
देहरादून, उत्तराखंड

————————————————–
पर्यावरण की रक्षा के लिए अखिल भारतीय ब्राह्मण समिति के रक्षा सूत्र कार्यक्रम को समर्पित गीत
पेड़
जीवन जग को देता पेड़
जग से है क्या लेता पेड़?
शीतल सुखद सुहानी छाया
उसने धरती पर बिखरायी.
थके हुए राही की मंजिल
है जिसने आसान बनायी
सब का सच्चा साथी पेड़।
हम फल फूल उसी से पाते
जड़ी बूटियां उसकी खाते
इतना सब कुछ देता फिर भी
रहता हर दम हँसते गाते.
घर पक्षी का होता पेड़।
वह धरती का रूप सजाता
मुस्कानों के फूल खिलाता
धूप की चादर ओढ़ी फिर भी
शीतल मन्द समीर ब हाता
जन मन को हर्षाता पेड़।
बादल से लता है पानी
धरती को करता है धानी
पास नहीं रखता कुछ अपने
वीर कर्ण सा होता दानी.
पर हित जीवन जीता पेड़
जग से है क्या लेता पेड?


More Stories
प्रसव पीड़ा में तड़पती रही गर्भवती, 10 किमी पैदल चलकर पहुंची अस्पताल
रुड़की में कांवड़ पटरी पर चार बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत, तीन की मौत
आवाजाही खतरनाक: थलन के पास धंस रहा लंबगांव मोटर मार्ग