जीके पिपिल
देहरादून

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ग़ज़ल
कविता सुनना और सुनाना तो सिर्फ़ बहाना है
असल उद्देश्य तो आपस में मिलना मिलाना है
स्थिति क्या है हमारी अपनी खुद की नज़रों में
आईना यही खुद देखना और तुम्हें दिखाना है
परिवार ही सच्ची दुनियां होती है दुनियां वालों
यूं होने को और दिखने को तो सारा ज़माना है
आदमी जब हार जाता है संसार से झगड़ते हुए
तो सांत्वना व शक्ति का परिवार ही ठिकाना है
परिवार से समाज और समाज से देश बनता है
परिवार हमारी खुशियों का कीमती खज़ाना है
ज़िंदगी क्या है पानी पर पड़ा हुआ एक बबूला
इसी तरह बनना बार बार और बिगड़ जाना है
जन्म और मृत्यु के बीच का फासला है ज़िंदगी
जिसमें कमाना है और सारा छोड़कर जाना है।


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