March 11, 2026

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ख्यातिलब्ध लोक कलाकार व रंगकर्मी दीवान कनवाल का निधन

दीवान कनवाल अल्मोड़ा कोपरेटिव बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर सेवानिवृत्त थे। आमतौर पर हर उम्र के लोग उनको दीवान दा कहकर संबोधित करते थे। लोक गीत-संगीत से उनका गहरा नाता रहा।

अल्मोड़ा। जाने माने लोक कलाकार व रंगकर्मी दीवान कनवाल (65) अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने नगर के खत्याड़ी स्थित अपने आवास पर बुधवार प्रातः अंतिम सांस ली। वह कुछ दिनों से बीमार थे और हल्द्वानी से इलाज करा कर लौटे थे। उनके निधन पर सांस्कृतिक नगरी के साथ ही समूचे उत्तराखंड व देश-विदेश में फैले उनके चाहने वालो में शोक की लहर फैल गई। अपराह्न स्थानीय श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। स्व कनवाल अपने पीछे मां, दो विवाहित बेटे व दो बेटियों का भरपूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का कुछ समय पहले निधन हो गया था।

दीवान कनवाल अल्मोड़ा कोपरेटिव बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर सेवानिवृत्त थे। आमतौर पर हर उम्र के लोग उनको दीवान दा कहकर संबोधित करते थे। लोक गीत-संगीत से उनका गहरा नाता रहा। इस बीच लोक कलाकार अजय ढौंडियाल के साथ उनकी जुगलबंदी में गाया गया द्वी दिना का ड्यार शेरुवा, यो दुनी मा, ना त्यार, ना म्यार शेरुवा, यो दुनी मा काफी वायरल हुआ था। कुमाऊं के जनकवि शेरदा अनपढ़ के लिखे इस गीत को उन्होंने जीवंत बना दिया, इसके चलते संगीत प्रेमियों का इस प्रस्तुति को खासा प्यार मिला था।

पहली कुमाउंनी फिल्म मेधा आ में गाया था गीत

दीवान दा ने 1987 में पहली कुमाउंनी फिल्म मेधा आ, में यौ डाना कौ पारा देख्यूंछ न्यारा-न्यारा गीत गाकर अपनी प्रतिभा को सामने लाकर अपनी अलग पहचान बनायी थी। इसके बाद उनकी लोग संगीत की यह यात्रा जारी रही। उनके लोकप्रिय गीतों में ‘दाज्यु हमार जवाई रिषे ग्ये, ‘आज कुछे मैत जा’, ‘कस भिड़े कुनई पंडित ज्यू कस करछा ब्या’व ‘ह्यू भरी डाना जैसे कई गीत शामिल हैं, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा और आज भी गुनगुनाया जाता है। दीवान दा लोक गायक ही नहीं कुशल कलाकार भी थे। लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला में दशरथ सहित अन्य पात्रों का उनका शानदार अभिनय दर्शकों के दिलों में अलग छाप छोड़ी है।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

सीएम पुष्कर सिंह धामी व राज्यपाल गुरमीत सिंह ने दीवान कनवाल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कनवाल ने उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही नहीं कनवाल का निधन उत्तराखंड की लोक कला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों एवं उनके प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।

सांसद अजय टम्टा व गणेश गोदियाल ने जताया दुख

केंद्रीय राज्यमंत्री क्षेत्र के सांसद अजय टम्टा ने भी दीवान दा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है कहा है कि उनका जीवन लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को समर्पित रहा। उनके निधन से उत्तराखंड की सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल विधायक मनोज तिवारी जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज आदि ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

दीवान का जाना उत्तराखंड की सांस्कृतिक दुनिया के लिए बड़ी क्षति

उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने शोक संदेश में कहा है कि लोकगायक दीवान कनवाल का निधन उत्तराखंड की सांस्कृतिक दुनिया के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिवार व उनके असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

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