पार्वती देवी गंगा राम भट्ट ट्रस्ट का गठन वर्ष 2014 में किया गया था। केदारनाथ में जून 2013 में आई भीषण आपदा में अपने माता-पिता को खो चुकी अनाथ बेटियों को शैक्षिक सहायता देने के लक्ष्य से ट्रस्ट बनाया । वर्ष 2015 में पहली बार छात्रवृत्ति बांटी गई थी। इन 11 वर्षों के दौरान इस ट्रस्ट के माध्यम से 826 मातृ-पितृ विहीन मेधावी बेटियों को छात्रवृत्ति दी गई है। इनमें से 100 बेटियों के माता-पिता दोनों ही जीवित नहीं हैं।
उत्तराखंड मीमांसा न्यूज (ब्यूरो)। पार्वती देवी गंगा राम भट्ट ट्रस्ट की ओर से गुरुवार को राजकीय इंटर कॉलेज नागनाथ में 11वां छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस वर्ष 100 मातृ-पितृ विहीन बेटियों को छात्रवृत्ति वितरित की गई। इनमें से 5 मेधावी बेटियों के माता-पिता (दोनों) का देहांत हो चुका है। 68 बेटियों के या तो मां जीवित नहीं है या पिता जीवित नहीं हैं। 27 मेधावी बेटियों के माता जीवित तो हैं लेकिन वे बहुत गरीब हैं अथवा बहुत बीमार है या शारीरिक रूप से अक्षम हैं। 19 बेटियां आरक्षित वर्ग से हैं, इनको सरकार से छात्रवृत्ति भी मिलती है। 81 मेधावी बेटियां सामान्य वर्ग से हैं, जिनको किसी प्रकार की छात्रवृत्ति नहीं मिलती है।

कार्यक्रम कि मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पोखरी डॉ रीता शर्मा ने छात्रवृत्ति के सौ चैक बेटियों को दिए। डॉ शर्मा ने कहा कि हर सक्षम समृद्ध और विवेकशील व्यक्ति को इन मातृ-पितृ विहीन की शिक्षा में मदद करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राजकीय महाविद्यालय में भी कुछ बहुत गरीब बेटियां ऐसी भी हैं जो समय से अपनी फीस भी नहीं जमा कर पाती हैं। वो भी ऐसी बेटियों की यथासंभव मदद करती हैं।
कार्यक्रम में ट्रस्टी पूर्व शिक्षा निदेशक पुष्पा मानस ने कहा कि पार्वती देवी गंगा राम भट्ट ट्रस्ट का गठन वर्ष 2014 में किया गया था। केदारनाथ में जून 2013 में आई भीषण आपदा में अपने माता-पिता को खो चुकी अनाथ बेटियों को शैक्षिक सहायता देने के लक्ष्य से ट्रस्ट बनाया । वर्ष 2015 में पहली बार छात्रवृत्ति बांटी गई थी। इन 11 वर्षों के दौरान इस ट्रस्ट के माध्यम से 826 मातृ-पितृ विहीन मेधावी बेटियों को छात्रवृत्ति दी गई है। इनमें से 100 बेटियों के माता-पिता दोनों ही जीवित नहीं हैं। 460 बेटियों के माता-पिता में से कोई एक जीवित नहीं हैं । 266 मेधावी बेटियों के माता जीवित तो हैं लेकिन वे बहुत गरीब हैं अथवा बहुत बीमार है या शारीरिक रूप से अक्षम हैं। 158 आरक्षित वर्ग से हैं और 668 सामान्य वर्ग की हैं। ट्रस्ट की छात्रवृत्ति पाने वाली 826 मातृ-पितृ विहीन बेटियों में से 192 बेटियों ने हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी हासिल की है। प्रधानाचार्यों की संस्तुतियों के अनुसार प्रथम श्रेणी हासिल करने वाली ये लड़कियां खेतों में कृषि कार्य भी करती हैं, घर का सारा काम भी करती हैं, इनकी शैक्षिक उपलब्धियां भी गजब की हैं। कुछ बेटियों को तो आजीविका के लिए मनरेगा में मजदूरी का काम भी करना पड़ता है।
इस अवसर पर कालिका प्रसाद काला एडवोकेट ने बताया कि उन्होंने पहले भी नैनीताल उच्च न्यायालय में ऐसी बेटियों के लिए जनहित याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार किया। पुष्पा मानस ने बताया कि वे भी बहुत संघर्ष कर आगे बढ़ीं। उन्होंने बच्चों को समझाया कि विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत जुटानी पड़ती है। उन्होंने स्वयं भी ऐसी हालातों में ही सफलता पाई।
इन्टर कालेज सिंवाई के प्रधानाचार्य हर्षवर्धन खाली ने बताया कि बेटियों मेहनत से पढ़ना चाहिए। मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। इस अवसर पर राजकीय इन्टर कालेज नागनाथ के प्रधानाचार्य ने भी इन बेटियों को छात्रवृत्ति दिये जाने पर ट्रस्ट का आभार जताया।
ब्रह्मानंद किमोठी ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में बेटियां, उनके मात या पिता, कई स्कूलों के अध्यापक भी मौजूद थे।


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