नीतीश डोभाल
देहरादून, उत्तराखंड

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आओ मेरे पास
मैं बताऊंगा —
चाँदनी को मोड़कर
कैसे ख्वाब लिखे जाते हैं
तारों की स्याही से
कैसे रातें रंगी जाती हैं
नदी की लहरों में
कैसे तन्हा सदियाँ बहती हैं
पहाड़ों की ख़ामोशी में
कैसे धरती की धड़कन गूंजती है
बारिश की बूँदें
कैसे बादलों की चिट्ठियाँ हैं
हर परिंदे की उड़ान में
कैसे अधूरा छूटा सफ़र है
आओ मेरे पास
मैं बताऊंगा —
कैसे अपने भीतर की यात्रा
बाहर की दुनिया से
ज़्यादा ऊँची
ज़्यादा कठिन
और कहीं ज़्यादा सुंदर होती है..
Nitish Dobhal
सोमवार १९ मई, २०२५
@highlight


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