जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड
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गज़ल
किसी को गुलाब तो किसी को रात की रानी चाहिए
जिसको जैसी प्यास है उसको वैसा ही पानी चाहिए।
अगर करना है समागम समन्दर से समर्पण के साथ
तो पानी में झील की नहीं नदिया सी रवानी चाहिए।
आग की फितरत होती है कि बिन बुझाये ना बुझना
आग किसी की हो कहीं भी लगे उसे बुझानी चाहिए ।
नशा नशे के सेवन से ही नहीं दिखने से भी आता है
मगर ऐसी शक्ल पारखी की नज़रों में आनी चाहिए।
किसी को दर्ज़ करानी है अपनी मोहब्बत तारीख़ में
तो फिर मंजनू सा क़िरदार लैला सी कहानी चाहिए।।



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