वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ”
देहरादून, उत्तराखंड

——————————————————————-
राधा रानी नयनों से बोलतीं है प्रीत जब
मोहन सम्मोहन में चित्त हार जाते हैं
मुग्ध हो के विचरण होता प्रीत गलियों में
नेह का असीम तब द्वार बन जाते है
मोहक सी चितवन खिल उठा मधुवन
मन की वीणा के वो तो तार बन जाते हैं
रास के वो रचियता, गोपियों के प्रिय सखा
राधिका के श्यामल जी सार बन जाते हैं



More Stories
केदारनाथ मंदिर के कपाट भैयादूज पर 11 नवंबर को होंगे बंद
अभिनेत्री उर्मिला सनावर की बढ़ी मुश्किल, एक और केस दर्ज
बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में केस, सुसाइड नोट मिला